चारोळ्या
Tuesday, 7 February 2012
बाबा की आवाज
हम गरजते है बिच समंदर में ,
लहरों से टकराने के लिए !
निकलते है हर वक़्त तूफान की तरह ,
किनारों को चीरने के लिए !
मंजिले हो जाती है आसान,
बस एक ''जय भीम'' की गूंज से ,
क्योंकि , अब हम निकले है ,
बाबा की आवाज बनकर ,
समाज को इकट्ठा करने के लिए !
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