चारोळ्या
Wednesday, 8 February 2012
जी कर देखो...
ए इन्सान परखना हो तो
खुद को एकबार परखकर देखो
भूल जा वो बीती बाते उन लम्हों को याद कर
दोस्ती वो नशा है जो परखने से नजर नहीं आती
हो सके तो एक बार उसे जी कर देखो...
...डॉ.संदीप नंदेश्वर
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