Thursday, 16 February 2012

जीवनाचे अर्थ

काल जे झाले
ते स्वप्न होते
आज जे झाले
ते वास्तव होते
उद्या जे होणार
ते सत्य असेल
त्यातच जीवनाचे
अर्थ असेल.....
-----डॉ. संदीप  

तू सोबत असतांना

एकटे लढतांना उर्मी होती जिंकण्याची
प्रवासामध्ये जिद्द होती पोहचण्याची
कार्यामध्ये लय होती परिस्थिती बदलण्याची
पण आता तू सोबत असतांना
चळवळीमध्ये शक्ती आली समाज बदलण्याची
---डॉ. संदीप 


स्वतःला जिंकलो.

यशाच्या शिखरावर मी सदैव चढलो.
आयुष्यातील दुःखाशी यशस्वी लढलो.
कधी संघटीत कधी एकटाच पेटलो.
पण तुझ्यामुळे आज मी
भावनेच्या विश्वात स्वतःला जिंकलो.
---डॉ. संदीप नंदेश्वर.

खुशिया लौट आयी

इसी दिन के इंतजार में
हमने कई राते काटी
दिन निकला तो उमंग जागी
बनाया मन तो हंसी आयी
तेरे सहारे जिंदगी की
सारी खुशिया लौट आयी
---डॉ. संदीप 

तुला जिंकायला

चंद्र टपोर बसलाय चांदणीला टिपायला
हिमालय खुणावतोय दिशा बदलायला
काय रे वेडी तू बसलीस रडायला 
मी दिल्ली जिंकतोय तुला जिंकायला
---डॉ. संदीप 

Wednesday, 8 February 2012

सच्चाई छोड़ जाए !

पल भर कि जिंदगी यु ही न गुजर जाए
सफलता की ऊंचाईयोंपर शिकायत का मौका न लाए
मिट जाए हस्ती तो कोई गम नहीं मगर
जाते जाते अपने पीछे सच्चाई छोड़ जाए !
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, नागपुर.

जी कर देखो...

ए इन्सान परखना हो तो
खुद को एकबार परखकर देखो
भूल जा वो बीती बाते उन लम्हों को याद कर
दोस्ती वो नशा है जो परखने से नजर नहीं आती
हो सके तो एक बार उसे जी कर देखो...
...डॉ.संदीप नंदेश्वर

दोस्ती के नाम

यु न मायुस हो जिंदगी की ये श्याम
दोस्ती बरकरार रहे सुबह और श्याम
ओझल हो चाहे ये चाँद और सूरज
पर चलती रहे धड़कन दोस्ती के नाम
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, nagpur.

Tuesday, 7 February 2012

जख्म

हम उस गलिसे गुजरते नहीं,
जहाँ  फूलो की महक होती है,
काटे अक्सर हमारी रहो में होते है,
वहा जख्म  खाने  की  कोई  शिकायत  नहीं  होती ..
Dr. Sandeep

बाबा की आवाज

हम गरजते है बिच समंदर में ,
लहरों से टकराने के लिए !
निकलते है हर वक़्त तूफान की तरह ,
किनारों को चीरने के लिए !
मंजिले हो जाती है आसान,
बस एक ''जय भीम'' की गूंज से ,
क्योंकि , अब हम निकले है ,
बाबा की आवाज बनकर ,
समाज को इकट्ठा करने के लिए !

हमारी चुप्पी

लोग  समझते  है  की ,
हमारी  चुप्पी  का  मतलब  उनकी  जित  होती  है ,
लेकिन  वो  यह  नहीं  समझते  की ,
वो  उनकी  मज़बूरी  होती  है ,
क्योंकि  वो  वही  रुके  होते  है ,
और  हम  कही  और  आगे  निकल  जाते  है ....
Dr. sandeep nandeshwar

दबंग

कैसे  आएगा  जीने  में  रंग
जब  साथ  न  हो  कोई  संग
हौसलों  में  जब  जागी  उमंग
तो  कैसे  न  बने  हम  दबंग
Dr. Sandeep Nandeshwar

समाज का...

लोहे  की  दीवारों  में  शीशा  कहा  से  लाऊ
शीशे  के घर  में  पत्थर  कैसे  सजाऊ
गर  बुनियाद  हो  पत्थर  सी,
sina  हो  पोलाद  का ,
तो  फिर  शीशे  भी  कह  उठेंगे,
देख  लो  ए  दुनिया  वालो,
मै आईना   हु  इंसानी   समाज  का...
Dr. संदीप नंदेश्वर

मैत्री

ख-या मैत्रीचा अनुभव घेऊन पाहावे
मैत्रीचा गोडवा चाखून पाहावे
प्रत्येकाने एकदा तरी मैत्रीच्या गावाला जाऊन पाहावे
शोर्टकट पायवाट विसरून पाहावे
मैत्रीच्या लाँगड्राईवला प्रत्येकाने जाऊन पहावे
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, नागपूर

सच्चाई

पल भर कि जिंदगी यु ही न गुजर जाए
सफलता की ऊंचाईयोंपर शिकायत का मौका न लाए
मिट जाए हस्ती तो कोई गम नहीं मगर
जाते जाते अपने पीछे सच्चाई छोड़ जाए !
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, नागपुर.