एकटे लढतांना उर्मी होती जिंकण्याची
प्रवासामध्ये जिद्द होती पोहचण्याची
कार्यामध्ये लय होती परिस्थिती बदलण्याची
पण आता तू सोबत असतांना
चळवळीमध्ये शक्ती आली समाज बदलण्याची
---डॉ. संदीप
यशाच्या शिखरावर मी सदैव चढलो.
आयुष्यातील दुःखाशी यशस्वी लढलो.
कधी संघटीत कधी एकटाच पेटलो.
पण तुझ्यामुळे आज मी
भावनेच्या विश्वात स्वतःला जिंकलो.
---डॉ. संदीप नंदेश्वर.
पल भर कि जिंदगी यु ही न गुजर जाए
सफलता की ऊंचाईयोंपर शिकायत का मौका न लाए
मिट जाए हस्ती तो कोई गम नहीं मगर
जाते जाते अपने पीछे सच्चाई छोड़ जाए !
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, नागपुर.
ए इन्सान परखना हो तो
खुद को एकबार परखकर देखो
भूल जा वो बीती बाते उन लम्हों को याद कर
दोस्ती वो नशा है जो परखने से नजर नहीं आती
हो सके तो एक बार उसे जी कर देखो...
...डॉ.संदीप नंदेश्वर
यु न मायुस हो जिंदगी की ये श्याम
दोस्ती बरकरार रहे सुबह और श्याम
ओझल हो चाहे ये चाँद और सूरज
पर चलती रहे धड़कन दोस्ती के नाम
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, nagpur.
हम गरजते है बिच समंदर में ,
लहरों से टकराने के लिए !
निकलते है हर वक़्त तूफान की तरह ,
किनारों को चीरने के लिए !
मंजिले हो जाती है आसान, बस एक ''जय भीम'' की गूंज से ,
क्योंकि , अब हम निकले है ,
बाबा की आवाज बनकर ,
समाज को इकट्ठा करने के लिए !
लोग समझते है की ,
हमारी चुप्पी का मतलब उनकी जित होती है ,
लेकिन वो यह नहीं समझते की ,
वो उनकी मज़बूरी होती है ,
क्योंकि वो वही रुके होते है ,
और हम कही और आगे निकल जाते है ....
लोहे की दीवारों में शीशा कहा से लाऊ
शीशे के घर में पत्थर कैसे सजाऊ
गर बुनियाद हो पत्थर सी, sina हो पोलाद का ,
तो फिर शीशे भी कह उठेंगे, देख लो ए दुनिया वालो,
मै आईना हु इंसानी समाज का...
Dr. संदीप नंदेश्वर
ख-या मैत्रीचा अनुभव घेऊन पाहावे
मैत्रीचा गोडवा चाखून पाहावे
प्रत्येकाने एकदा तरी मैत्रीच्या गावाला जाऊन पाहावे
शोर्टकट पायवाट विसरून पाहावे
मैत्रीच्या लाँगड्राईवला प्रत्येकाने जाऊन पहावे
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, नागपूर
पल भर कि जिंदगी यु ही न गुजर जाए
सफलता की ऊंचाईयोंपर शिकायत का मौका न लाए
मिट जाए हस्ती तो कोई गम नहीं मगर
जाते जाते अपने पीछे सच्चाई छोड़ जाए !
---डॉ. संदीप नंदेश्वर, नागपुर.