Friday, 16 September 2011

घसीटते हुए

क्या करे जब इन्सान अपने न हो
अपने ही परायो के साथ में बैठे हो
बुलाने भर से काम चलेगा नहीं
घसीटते हुए लाए बगैर
अब दूसरा तो कोई रास्ता  दिखता नहीं

Wednesday, 14 September 2011

संकल्परात्री

हर रोज मै उठता हु एक नया सपना लेकर
दिन भर लढते झगड़ते पाना चाहता हु उसे
कोशिश करो की कुछ नया कर दिखाए
इसी सोच में आप सभी को सोने से पहले
संकल्परात्री कहना चाहता हु ! "जय भीम" ! "जय भीम" ! 

Tuesday, 13 September 2011

जुल्म

जुल्म से टूटता है बदन हमारा
प्यास हमें चूसने की थमती नहीं इनकी
जब तक सहने की आदत है हमें
रुलाने की आदत थमती नहीं इनकी

जीवनसाथी

वो तेरी बेदर्दी में हाले दिल बयाँ न कर सके
तुम्हे छोड़ कर किसीपे विश्वास न कर सके
क्या हुआ हम तुम्हारे जीवनसाथी हो न सके
अरे पगली जरा सोच
आज तक हम किसी और के हो न सके

अण्णा

अण्णा भगाओ, देश बचाओ !
संविधान चलाओ, भ्रष्टाचार मिटाओ !
अधिकार बचाओ, प्रशासक बनाओ !
संसद की सार्वभौमता मान्य करो, वरना देश खाली करो !
न्यायपालिका की लाज बचाओ, नागरिक होने का हक़ जताओ !
पहले मंदिर की संपत्ति बाटो, फिर गरिबो को न्याय दिलाओ !

क्रांति

रोज टपकते है आंसू हमारे
शोला बनकर भड़कने के लिए
लोहे के चने चबाने वालो उठो
क्रांति बनकर बरसने के लिए